Haryana Rajya Ka Gathan (हरियाणा राज्ये का गठन)

Haryana Rajya ka Gathan Important Facts and Objective Question.

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हरियाणा राज्ये का गठन (Haryana Rajay ka gathan) -हालांकि हरियाणा अब पंजाब का एक हिस्सा नहीं है पर यह एक लंबे समय तक ब्रिटिश भारत मे पंजाब प्रांत का एक भाग रहा है और इसके इतिहास में इसकी एक महत्वपूर्ण भूमिका है। हरियाणा के बानावाली और राखीगढ़ी, जो की अब हिसार में हैं, सिंधु घाटी सभ्यता का हिस्सा रहे हैं, जो कि 5000 साल से भी पुराने हैं।जेसा के हम सब जानते है वर्तमान हरियाणा का गठन 01नवम्बर 1966 को हुआ लेकिन वर्तमान हरियाणा के गठन की कहानी देश की आज़ादी से पूर्व ही आरम्भ हो चुकी थी. यहाँ हम हरियाणा के गठन से संभंधित पूरण तथ्य विस्तारपूर्वक पढेंगेI

1958- 1857 के सवतंत्रता संग्राम से पहले हरियाणा दिल्ली का हिसा था किन्तु 1857 के संग्राम के बाद हरियाणा को दिली क्षेत्र से निकाल कर पंजाब क्षेत्र में शामिल कर लिया गया था और एसा हरियाणा वासियों द्वारा 1857 के संग्राम में बढ़ चदकर भाग लेने के कारण किया गया था

Haryana Rajya ka Gathan (हरियाणा राज्ये का गठन)

1926– हरियाणा को दिल्ली क्षेत्र से निकल कर पंजाब में शामिल किया जाने के विरुद्ध सबसे पहले मांग 1926 में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के दिल्ली अधिवेशन में सवागात समिति के सदस्य पीरजादा मुहमद के द्वारा उठाई गई.

1932– 1932 में दीनबंधु गुप्त द्वारा हरियाणा को पंजाब प्रान्त से अलग करने की मांग की गई I गांधी जी के द्वारा भी इस मांग का सवागत किया गया I

1946– 1946 में अखिल भारतीय भाषाई कांफ्रेंस में पट्टाभी सितारामिया के द्वारा दीनबंधु गुप्त की मांग का समर्थन किया गया.

1947 में जब भारत 200 वर्ष की दासता के बाद आजाद हुआ उस समाये हरियाणा पंजाब का हिसा था. (हरियाणा राज्ये का गठन)

1949– 1949 में जब गेर पंजाबी क्षेत्रो में पंजाबी पढना अनिवार्य किया गया तो राज्ये में भाषाई विवाद उत्पन हो गया और इस विवाद को शांत करने के लिए 01 अक्टूबर 1949 को पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री भीम सेन सच्चर दवार सच्चर फार्मूला दिया गया जिसके तहत पंजाबी क्षेत्र के लोग पंजाबी और हिंदी क्षेत्र के लोग हिंदी भाषा का अध्यन करेंगे किन्तु प्रदेश में यह फार्मूला सफल नहीं हो पाया और अलग हरियाणा राज्ये की मांग दिन प्रतिदिन जोर पकडती गई.

1953– सरकार दवार 9 दिसम्बर 1953 को भाषाई आधार पर राज्यों के गठन की बढ़ रही मांगो का अध्यान करने के लिए फजल अली आयोग का गठन किया गया किन्तु इस आयोग के दवार भी भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग को नहीं माना गया किन्तु इस आयोग के दवार प्रशाशन को ठीक ढंग से चलाने के लिए हरियाणा को हिंदी और पंजाबी दो क्षेत्रो में विभाजित कर दिया. किन्तु यहाँ भी सवतंत्र हरियाणा राज्ये का गठन संभव नहीं हो सका.

1960- 1960 में सिखों के नेता मास्टर तारा सिंह के द्वारा अलग पंजाब की मांग उठाई गई और लोगो का भरी समर्थन इस मांग को मिला.

1965संत फ़तेह सिंह दवार अलग पंजाब की मांग के लिए अनशन किया और उधर से हरियाणा क्षेत्र के लोगो का भी भारी दबाव सरकार के ऊपर था इसीलिए 23 सितम्बर 1965 को सरदार हुकम सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई और हुकम सिंह समिति की सिफ़ारिशो को मानते हुए 23 अप्रैल 1965 को J C शाह की अध्यक्षता में एक सीमा आयोग का गठन किया गया.

1966– 31 मई 1966 को सीमा आयोग द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया जिसको मानते हुए 01 नवम्बर 1966 को हरियाणा एक अलग राज्ये के रूप में अस्तितव में आया.

Objective Question Haryana G.K. (Haryana Rajye ka Gathan)

हरियाणा राज्य का गठन संविधान के किस संशोधन द्वारा हुआ?

17 वा संविधान संशोधन

पंजाब हरियाणा सीमा आयोग के अध्यक्ष कोन थे?

जस्टिस जे सी शाह

हिंदी पंजाबी विवाद के दोरान कोन हिंदी क्षेत्रीय समिति के अध्यक्ष चुने गए?

बलवंत तायल

सीमा आयोग की संस्तुति के तहत पंजाब पुनर्गठन विधेयक कब पारित किया गया?

18 सितम्बर, 1966

सच्चर फार्मूला कब लागु किया गया?

1 अक्टूबर 1949

1 नवम्बर 1966 को हरियाणा का उदय कितने जिलो के साथ हुआ?

7 जिले

हिंदी के समर्थन में सत्याग्रह आन्दोलन से सबसे परभावित जिले कोन से थे?

रोहतक, हिसार.

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